Frequently Asked Questions

 1.मैं अपना ड्राइविंग लाइसेंस कैसे प्राप्त कर सकता हूं ?

उत्तर: आप अपने लाइसेंस बनवाने संबंधी सम्‍पूर्ण जानकारी के लिए http://www.transport.rajasthan.gov.in पर लॉग ऑन करें या अपने नजदीकी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में जाकर सम्‍पर्क कर सकते हैं।

2. मैं यातायात पुलिस द्वारा किये जाने वाले चालान व जुर्माना राशि के बारे में जानकारी कहॉ से प्राप्‍त कर सकता हूं?

उत्तर: मोटर वाहन अधिनियम 1988, केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989, और राज्य के मोटर वाहन नियम  देश में सड़क यातायात के संचालन के लिए कानूनी प्रावधान हैं। यातायात के नियमो का उल्‍लंघन एवं उनके फलस्‍वरूप लिये जाने वाले जुर्माने की जानकारी के लिए  क्लिक करे 

3. वाहन चलाते समय वाहन सम्‍बन्‍धी किन दस्‍तावेजों की आवश्‍यकता होती है?

उत्तर: वाहन चलाते समय एक वाहन चालक को निम्‍न दस्‍तावेज अपने साथ रखने चाहिए:- 

1. वाहन चालक का  ड्राइविंग लाइसेंस

2 . वाहन  का बीमा प्रमाण पत्र

3. वाहन का रजिस्‍ट्रेशन प्रमाण पत्र 

4. वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र 

 नोट:- उपरोक्‍त सभी कागजात असल होने चाहिए।  यातायात नियमों के उल्लंघन पर दस्तावेजों की फोटोकॉपी पुलिस निरीक्षण के दौरान मान्य नहीं होगी एवं व्‍यवसायिक वाहनों के साथ उपरोक्‍त कागजात के अतिरिक्‍त वाहन का परमिट व फिटनेस प्रमाण पत्र भी साथ रखना अनिवार्य है। 

4. एक अच्छे वाहन चालक की क्‍या विशेषताएं है?

उत्तर: एक वाहन चालक को सड़क पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुरक्षात्‍मक तरीके से एकाग्र व शांत मन और शराब या अन्य नशीली दवाओं के प्रभाव से रहित, विश्राम किया हुआ होना चाहिए।

5. राजमार्ग सम्मोहन क्या है?

उत्तर: सड़क ड्राइविंग की सबसे बड़े खतरों में से एक उनींदापन या "राजमार्ग सम्मोहन" है। नींद की कमी या थकान के कारण सुरक्षित रूप से वाहन ड्राइव करने की क्षमता प्रभावित होती है। एक लंबी यात्रा नींद से बचाव के लिए वाहन को निर्धारित स्‍थान पर पार्किग कर कॉफी/चाय ले, हल्‍का व्यायाम करें। ऑखों के व्‍यायाम के लिए सड़क पर लगे यातायात संकेतकों को पढ़ें या सड़क के दोनों तरफ अन्‍य भागों पर अपनी आंखों का ध्यान स्थानांतरण करें।

6. वाहन चालन की गति क्‍या होनी चाहिए?

उत्तर: वाहन चालक को स्‍वविवेक से काम लेना चाहिए। बहुत तेज या बहुत धीरे धीरे वाहन चालन से  खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है। पोस्ट की गति सीमा, मौसम और यातायात की स्थिति के अनुसार धीरे ड्राइव कर सकते हैं। वाहन चालक की गति परिस्थिति अनुसार यातायात प्रवाह के अनुरूप हो, तथा अधिकतम तयशुदा गतिसीमा को पार न कर पाये।
  

7. कोहरे के दौरान कैसे ड्राइव करे ?

उत्तर: कोहरे में ड्राइव करना अच्छा नहीं है। कोहरे में वाहन चलाते समय निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए :-

 धीरे चलें, हेडलाइट्स या लम्‍बी पूंछनूमा रोशनी देखने पर अधिक धीमा चले। कोहरे में एक चालक सड़क के केंद्र में वाहन चला सकता है या वाहन को रोक सकता है। अपने वाहन  में डीपर का प्रयोग करें व फोग लाईट का उपयोग करें।
 यदि कोहरा घना हो, तो हेडलाइट्स तेज न करें.आपको अचानक वाहन रोकना पड सकता है इसलिए अपनी दृष्टि सीमा के भीतर चलें तथा सडक के किनारे पर ही वाहन को रोके।
मुडते तथा रूकते समय अन्य चालकों को सचेत करने के लिए अपने वाहन के इंडिकेटर को बहुत पहले शुरू कर देना चाहिए।


8. बारिश के दौरान चालक को कौन सी सावधानियां रखनी चाहिए ?

उत्तर: जब बारिश हल्के से गिरनी शुरू होती है तो पानी, धूल, तेल और पत्तियां सड़क पर फिसलन उत्‍पन्‍न कर  देती हैं, ऐसा होने पर वाहनों के बीच दूरी बढा लेनी चाहिए। चौराहे तथा मोड पर विशेष सावधानी रखनी चाहिए, वाईपर चलाते समय वाहन की हैडलाईट चालू रखनी चाहिए। पार्किंग लाईट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्‍योंकि यह भ्रम उत्‍पन्‍न करती है।
 

9. तेज हवा के दौरान ड्राइविंग कैसे करे ?

उत्तर: हवा सभी ड्राइवरों के लिए एक मुश्किल समस्या होती है। तेज हवा ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के चालकों के लिए विशेष रूप से कठिन है। तेज हवाओं में अपने वाहन की गति को कम रखना चाहिए। तेज हवाओं के साथ अक्सर भारी बारिश भी हो सकती है इसलिए गीले व फिसलन वाले स्‍थानों व ऐसे हालातों के प्रति सावधान रहना चाहिए।

10. वाहन के उपकरण खराब होने पर क्या करना चाहिए ?  

उत्तर: उपकरण खराब होने पर अक्सर दुर्घटनाएं होती है। सबसे महत्वपूर्ण उस समय आपको शांत रहना चाहिए। उपकरण विफलता निम्‍न हो सकती हैं:-

    1.संचालन विफलता:- अगर आप अचानक स्टीयरिंग व्हील का नियंत्रण खो देते हैं, तो एक्‍सीलेटर से अपने पैर को हटा लेना चाहिए व आपातकालीन फ्लैसर चालू कर देना चाहिए और असंतुलन से बचने के लिए धीरे धीरे ब्रेक लगने चाहिए।

    2.ब्रेक फेल:- अगर आपके वाहन के ब्रेक अचानक फेल हो जाते हैं तो दबाव बनाने के लिए बार बार ब्रेक लगायें यदि वह काम नहीं करते हैं तो आपातकालीन या पार्किंग ब्रेक का उपयोग करें तथा वाहन को  धीमा करने के लिए वाहन के गियर को डाउन करना चाहिए।

   3.हेडलाइट विफलता:- अगर वाहन के हेडलाइट्स अचानक विफल हो जाते हैं तो वाहन के  आपातकालीन फ्लैशर, पार्किंग लाइट और इंडिकेटर को चालू करें, वाहन को सडक के किनारे चलाएं यदि वाहन की रोशनी कम हो रही हो, तो वाहन सडक के किनारे चलाते हुए किसी सर्विस स्‍टेशन पर ले जाये और सहायता प्राप्‍त करें।    

   4.दृष्टि अवरुद्ध :- अगर किसी वजह से दृष्टि अवरुद्ध हो जाती है तो देखने के लिए खिडकी का उपयोग करे और  वाहन के आपातकालीन फ्लैसर चालू करके वाहन को सडक के किनारे ले जाये।  

11. रात में ड्राइविंग के दौरान क्‍या क्‍या सावधानिया रखनी चाहिए ?

उत्तर: रात को वाहन चलाना मुश्किल है क्‍योंकि रात में दृश्‍य दिन कि तुलना मे अलग ढंग से दिखाई देते हैं व चकाचौंध रोशनी से दृष्टि बाधित होती हैं। रात में वाहन चलाने के समय विवेक पूर्वक सावधानी रखनी चाहिए।

    1 वाहन की हैडलाईट ज्‍यादा तेज नहीं रखनी चाहिए। वाहन के डीपर का प्रयोग सामने आते हुए वाहन के लिए        500 फीट की दूरी व ओवरटेक के दौरान 300 फीट की दूरी पर डीपर का प्रयोग करें।

    2  यदि  स्ट्रीट लाइट की रोशनी ज्‍यादा हैं तो वाहन के डैशबोर्ड की लाईट कम करें तथा सनवाईजर का उपयोग        करें। अपने वाहन के अंदर किसी भी अन्य प्रकाश के उपयोग से बचें।

    3  रोड साईन को रात में देखना अधिक कठिन हैं।

    4 वाहन चलाते समय गाइड के रूप में किनारे लाइनों और सड़क के केंद्र लाइनों का प्रयोग करें।

    5  सड़क के बीच वाहन न रोके। अगर वाहन रोकना अतिआवश्यक है, तो वाहन की लाल चेतावनी प्रकाश का        उपयोग करें।

12. वाहन के इंजन मे आग लगने पर क्‍या सावधानी रखे ?

उत्तर: अगर वाहन मे धुआं दिखाई देता है तो वाहन को सडक के किनारे ले जाये तथा इंजन बंद कर दें व वाहन से दूर जाकर फायर ब्रिगेड कार्यालय को इस बारे में सूचित करें, वाहन में आग बहुत खतरनाक हो सकती है। अपने आप आग बुझाने का प्रयास न करें।

13. क्‍या ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल सही है ?

उत्तर: वाहन चलाते समय फोन का इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। अगर आपका कॉल जरूरी हो, तो वाहन को सडक किनारे रोक कर बात करें। 

14. वाहन चलाते समय क्‍या शराब पीना उचित है?

उत्तर: शराब पीकर वाहन चलाना अनुचित व गैर कानूनी है तथा दुर्घटना की पूर्ण सम्‍भावना रहती है।

15. जंक्शन के केंद्र में क्रिसक्रोस को पेंट क्‍यो किया जाता हैं ?

उत्तर: क्रिस क्रॉस  "नहीं खड़े" होना इंगित करता है अर्थात् क्रिस क्रोस पर खडा नहीं होना चाहिए।

16. यातायात पुलिस द्वारा चौपहिया वाहन का चालान किया जाता है तो उस समय यदि वाहन चालक के पास जुर्माना राशि नहीं हो, तो अन्य विकल्प क्या हैं ?

उत्तर: यातायात पुलिस द्वारा चौपहिया वाहन का चालान किया जाता है तो उस समय यदि वाहन चालक के पास जुर्माना राशि नहीं हो, तो चालक के मूल ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र या अन्‍य सम्‍ब‍ंधित मूल दस्‍तावेज में से कोई एक दस्‍तावेज जप्‍त करके संबंधित अधिकारी एक रसीद देगा, जिसे 15 दिवस के भीतर वाहन चालक यातायात नियन्‍त्रण कक्ष अजमेरी गेट आकर रसीद दिखा व जुर्माना राशि जमा करवाकर अपने दस्‍तावेज प्राप्‍त कर सकता है अगर चालक 15 दिवस के भीतर अपना दस्‍तावेज नहीं लेता है, तो वह दस्‍तावेज यातायात पुलिस द्वारा संबधि‍त कोर्ट को भेज दिया जाता है।
 

17. मैं एक डॉक्टर हूॅ यदि कोई अरजेन्‍ट कॉल आ जाए तो क्‍या ड्राइविंग करते समय मोबाइल फोन का उपयोग कर सकता हूॅ ?

उत्तर: वाहन ड्राइविंग करते समय वाहन चालक मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकते,  इस नियम में डॉक्टरों का कोई अपवाद नहीं हैं, यदि यह कॉल आपके लिए आपातकालीन है, तो चालक सड़क के किनारे पर वाहन पार्क कर और कॉल ले सकते हैं।

18. कोर्इ व्‍यक्ति दुर्घटना में शामिल हो, या किसी दुर्घटना का साक्षी हो तो उन्‍हें क्या करना      चाहिए ? 

उत्तर: अगर कोर्इ वाहन चालक दुर्घटना का कारण बना है तो उसे दुर्घटना में घायल व्यक्ति की चिकित्सा सहायता के लिए व्यवस्था करनी चाहिए और तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए और अगर कोई व्यक्ति दुर्घटना का साक्षी है, तो सबसे पहले उसे घायल व्यक्ति की मदद करनी चाहिए और फिर पुलिस को सूचित करना चाहिए। साक्षी को आरोपी के वाहन के साथ तोडफोड नहीं करनी चाहिए।

19. वाहन चलाते समय सामान्यतया किन कारणों से दुर्घटना हो सकती है व इनसे बचाव के क्या उपाय है 

उत्तर:- वाहन चलाते समय सामान्‍यतया निम्‍न कारणों से दुर्घटना हो सकती है:-

1. मोबाइल पर बात करना:- अध्ययनों से पता चला है कि वाहन चलाते समय मोबाइल पर बाते करने से चालक का ध्यान भंग हो जाता है जिससे दुर्घटना का खतरा चार गुना तक बढ जाता है।

2. कार की सेटिंग को बदलना:- वाहन चलाते समय रेडियो का चैनल बदलने से, एसी चालू/बंद करने से खिडकियां खोलने/बंद करने से भी चालक का ध्यान भंग होता है जिससे सडक के यातायात से ध्यान बंटता है व दुर्घटना होने का खतरा बढ जाता है। इसलिए सही तरीका है वाहन चलाने से पहले ही सभी सेटिंग्स सही करने के पश्चात ही वाहन चालक वाहन को चलाए।

3. सहयात्री:- अध्ययन बताते हैं कि अगर युवा वाहन चालक के साथ अगर उसके मित्र होते हैं तो बहुत बडा खतरा हो सकता है। सहयात्री को वाहन चालक की एकाग्रता भंग नही करनी चाहिए।

4. खाना पीना व ध्रुम्रपान करनाः- शराब पीकर गाडी चलाने के साथ-साथ अन्य कुछ भी खाने पीने से यातायात से ध्यान हटता है ध्रुम्रपान से खतरा और बढ जाता है।

5. मौसम का खराब होनाः- गाडी चलाते समय अचानक मौसम खराब हो जाने से सडक यातायात प्रभावित होता है। जैसे तेज हवा का चलना, तेज आंधी का होना, बरसात का होना, बिजली चमकना, कोहरा छा जाना आदि।

6. सडक पर व्यवहारः- सडक उपयोगकर्ता एक दूसरे का सम्मान न कर कई मर्तबा प्रतियोगिता करते हैं जिससे यातायात प्रभावित होता है तथा दुर्घटना का खतरा बढ जाता है।

     इसके अलावा और भी कई चीजें यातायात से ध्यान भंग कर सकती है जैसे विज्ञापन, पदयात्री आदि। इसलिए सुरक्षित रहे एंव वाहन चलाते समय केवल वाहन चालन का ध्यान रखे।

20. अलग-अलग प्रकार के वाहनों की अधिकतम गति सीमा क्या निर्धारित की हुई है ?

उत्तरः- कार (निजी)             60  कि.मी./घं.
            मोटरसाइकिल         40 कि.मी./घं.

21.सड़क दुर्घटना में हैलमेट किस प्रकार बचाव करता है?

उत्तरः- हैलमेट दुर्घटना से होने वाली गंभीर सिर की चोट के प्रभाव को कम करता है। हैलमेट तीन तरह से काम करता हैः-

1. हैलमेट के अन्दर प्रयुक्त होने वाले मेटेरियल की वजह से सिर तेजी से किसी वस्तु से नहीं टकराता जिससे दिमाग को होने वाली क्षति कम हो जती है।

2. हैलमेट की वजह से टकराव का प्रभाव उसकी सतह पर फैल जाता है व सिर के किसी एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की सम्भावना कम हो जाती है।

3. हैलमेट सिर व टकराने वाली वस्तु के बीच बेरियर का कार्य करता है।

उपरोक्त बातें  हैलमेट की चार विशेषताओं बाहरी कवच, प्रभाव को अवशोषित करने वाली परत, आरामदायक परत व चिन स्टेप की वजह से सिद्ध हो जाती है।

22.दुर्घटना से बचाव मे काम आने वाले एयर बैग सम्बन्धित विशेष सावधानियां कौन कौन सी है?

उत्तरः- एयरबैग के ज्यादा नजदीक बैठे व्यक्ति को बैग के बल से ज्यादा नुकसान हो सकता है। एयरबैग व व्यक्ति में कम से कम 10 इंच की दूरी होनी चाहिए। इसलिए चालक को चाहिए कि वह अपने बैठने की मुद्रा सही रखे। एयरबैग से ज्यादा निकट न बैठे।

अगर आपकी दूरी स्टीयरिंग व्हील से 10 इंच से कम है तो अपनी सीट को निम्न प्रकार से एडजस्ट कर सकते है:-

-ड्राइविंग सीट को थोड़ा सा पीछे की ओर झुकाये।
-यदि स्टीयरिंग एडजस्टेबल है तो उसे अपने चेहरे के बजाए छाती की ओर एडजेस्ट करें।

बच्चों के लिए नियम कुछ अलग है। एयरबैग बच्चों को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। उसके लिए निम्न       बातों का ध्यान रखना चाहिएः-

-12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को चाइल्ड कार सीट में अच्छी तरह बैठना चाहिए।
-एक साल से कम उम्र के बच्चों को आगे की सीट पर नहीं बैठाना चाहिए।
-एक साल से बड़े बच्चों को आगे की सीट पर अच्छी तरह सीट बैल्ट बांध कर और सीट को पीछे की ओर ले       कर बैठाना चाहिए।
-एयरबैग तभी महत्वपूर्ण होता है यदि उसे सीट बैल्ट के साथ इस्तेमाल किया जाए। सिर्फ एयरबैग पूर्ण सुरक्षा नही दे सकता।

23. प्रत्येक वाहन चालक को मोटर यान अधिनियम 1988 की किन धाराओं से परिचित होना               चाहिए ?

उत्तरः- प्रत्येक वाहन चालक को मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा112,113,121, 122, 125,132, 134, 185,186,194 और 207 के उपबन्धों से परिचित होना चाहिए। 

24. राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना सहायता सेवा योजना (एन एच ए आर एस एस) क्या है ?

उत्तर:- सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना सहायता सेवा   योजना (एन एच ए आर एस एस) नामक एक योजना आरंभ की है। इस योजना के अंतर्गत राहत एवं बचाव कार्यो के लिए राज्यों, संघ राष्ट्र क्षेत्रो/गैर सरकारी संस्थानों को क्रेन तथा एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जाती है ताकि सड़क दुर्घटना के पश्‍चात दुर्घटना के पीडि़तों को निकटवर्ती चिकित्सा सहायता केन्द्र तक पहुंचाया जा सके तथा दुर्घटना स्थल पर यातायात को सुगम बनाया जा सके।

    इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय की “ट्रोमा केन्द्रो के एकीकृत नेटवर्क की स्थापना “ योजना के अंतर्गत स्वर्णिम चतुर्भुज में स्तरोन्नयित किये जाने वाले चिन्हित अस्पतालों को परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय द्वारा उन्नत लाइफ सर्पोट एम्बुलेंस उपलब्ध कराए जाएगें।  

    सड़क दुर्घटनाओ में मौत को लेकर एक गलत धारणा यह है कि अधिकतर मौतें गंभीर चोटों और खून बहने से होती हैं। वास्तविकता यह है कि सड़क दुर्घटना में मौत का सबसे सामान्य कारण आक्सीजन की पूर्ति करना है। अधिकतर मामलो मे शरीर पर गहरे प्रभाव और सदमें के कारण वायु मार्ग अवरूद्व होने के चार मिनट से भी कम समय में मौत हो जाती है।

25.“द गोल्डन आवर“ ( स्वर्णिम घंटा ) क्या है ?

उत्तर:- कोई भी चोट लगने के बाद का एक घंटा बहुत महत्वपूर्ण होता है। उस दौरान सड़क दुर्घटना के पीडि़तों को तत्काल और समुचित प्राथमिक चिकित्सा देने से उनका जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ जाती है और चोट की गंभीरता कम होती है। समय पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराकर कई मौतों तथा अशक्तताओं को टाला और चोट की गंभीरता की रोकथाम की जा सकती है।

   ट्रोमा केन्द्रों की यह स्वीकार्य नीति है कि यदि चोट लगने एक घंटे के भीतर, जिसे “स्वर्णिम घंटा“ कहते है, आरंभिक स्वास्थ्य स्थिरता को बनाये रखने के लिए आधारभूत जीवन सहायक, प्रथम उपचार और द्रव्यो का प्रतिस्थापन प्रदान किया जाए तो अनेक दुर्घटना पीडि़तो की जान को बचाया जा सकता है। इसके लिए यह अत्यंत आवश्‍यक है कि इस प्रकार कि आपदा कि स्थिति में उपचार के लिए निश्चित समयावधि के भीतर प्रशिक्षित कार्मिकों द्वारा आरंभिक स्थिरता, तीव्र परिवहन तथा चिकित्सा सुविधायें प्रदान की जाएं।

   यह हमेशा मुमकिन नहीं है कि एक घंटे के भीतर पीडि़त तक समुचित चिकित्सा सहायता पहुंच जाए। ऐसे मामले मे राहगीर और वहां मौजूद अन्य लोग घायल व्यक्ति ( पहली सहायता करने वाले ) को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर सकते हैं। लेकिन, कई बार पीडि़त व्यक्ति की अनुचित ढंग से देखभाल से स्थिति बिगड़ जाती है। दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की प्राथमिक चिकित्सा अधिक जटिल नहीं है, इसलिए हमें इसकी प्रक्रियाओं और ऐहतियातों के बारे में परिचित होना चाहिए।

26. दुर्घटना पीडि़त व्यक्ति के इलाज में किन-किन प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की आवश्‍यकता है ?

उत्तर:- दुर्घटना पीडित व्‍यक्ति के इलाज में निम्‍न प्राथमिकताओं पर ध्‍यान देना आवश्‍यक है:-
-    श्वास में अवरोध ( आॅक्सीजन न मिलना )
-    हृदय के कार्य का एकदम से रूकना
-    तीव्र रक्तस्राव ( खून बहना )
-    अन्य चोटें/बीमारियां
तत्काल आवश्‍यकता :-

संकटपूर्ण चार मिनट - किसी भी सड़क दुर्घटना में मौत का एक सबसे सामान्य कारण आॅक्सीजन की सप्लाई रूकना होती है। अधिकतर मामलों में इसका कारण वायु मार्ग का अवरूद्ध  होना है।
याद रखें-
  1. स्थल को सुरक्षित बनायें
  2. घायलो को खोजे
  3. उनकी सहायता करें 
  4. मदद के लिए बुलाएं और बेहोश पीडि़तों को खोजेें

ए बी सी के नियम का अनुसरण करें:-

ए - एयरवे यानी वायु मार्ग - वायु मार्ग यानी सांस लेने का रास्ता खोलें
बी- ब्रीदिंग यानी सांस लेना - मुंह से मुंह में सांस छोड़कर - ( रिससाइटेशन ) जीवन की बहाली में मदद करें।
सी- सर्कुलशन यानी रक्तसंचार - खून बहने को रोकें।

वायु मार्ग खोलना:- 

- पीडि़त को धीरे से और सावधानीपूर्वक जमीन पर लिटाएं ताकि और चोट लगने से रोका जा सके। 
- पीडि़त को एक ओर मोड़ें।
- गले, सीने और कमर पर कपड़े ढीले करे। 
- सिर को पीछे की ओर झुकाएं, चेहरा नीचे करें ताकि जीभ आगे होकर खून और उल्टी, बाहर आ सके।
- मुंह में लगी गंदगी, उल्टी, रक्त या टूटें दांत हटाएं।

श्वसन बहाली : -

-  मुंह से मुंह में सांस छोड़ना-लेना। यदि पीडि़त सांस नहीं ले पा रहा है तो उसे कृत्रिम श्वसन दें।
- पीडि़त को पीठ की ओर लिटाए और तत्काल मुंह से मुंह में सांस छोड़े-लें।
- सिर को पीछे झुकाए, जबड़ो को सहारा दें, गले से उंगलियां दूर रखें। 
- मुंह से मुंह अच्छी तरह लगाये ताकि आपके गाल पीडि़त के नाक पर रहे, सीना उपर उठने तक मुंह में फूंक          मारे।
- अपना मुंह हटाएं, सीना उपर से नीचे जाने तक देखे और नाक एवं मुंह से वायु निकलने को सुनें तथा महसुस        करे।
- यदि सीना उपर नहीं उठता है तो जांच करे।  
- बंद वायु मार्ग के लिए। 
- मुंह से मुंह लगाएं।
- पीडि़त व्यक्ति का श्वसन बहाल होने तक मुंह से मुंह लगाकर सांस छोड़े-लें। पीडि़त व्यस्क के लिए प्रत्येक         चार सेकेंड और बच्चे के लिए प्रत्येक तीन सेकेंड पर मुंह में सांस छोड़े-लें।

रक्तसंचार:-

- खून बहने से रोकना 
- खून बहने वाले घाव को साफ करें। कपड़े या बैंडेज के मोटे पैड की मदद से घाव पर सीधा दबाव डालकर खून        रोकें। 
- जिन शारीरिक अंगो से खून बह रहा है, उसे रोकने के लिए उन अंगो को उंचा उठाएं। 
- जिस जगह खून बह रहा है, वहां से बाहरी वस्तुएं हटाएं। 
- घाव के चारों ओर पैड और बैंडेज लगाएं। ह़डडिया टूटी दिखाई देने पर भी यही करे ।

27.दुर्घटना में घायल व्यक्ति के उपचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय का क्या निणर्य है ?

उत्तर:- चिकित्सा उपचार के लिए लाए गए प्रत्येक घायल नागरिक को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि उसके जीवन की रक्षा की जा सके और तत्पश्‍चात कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आरम्भ की जाए जिससे कि लापरवाही के कारण किसी की मृत्यु न हो। जब किसी चिकित्सक को तत्काल किसी घायल व्यक्ति की चिकित्सा करने के लिए बुलाया या अनुरोध किया जाता है तो इससे उस चिकित्सक को किसी प्रकार की कानूनी जटिलता का सामना नही करना पड़ता है। किसी व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना न केवल चिकित्सक के लिए प्राथमिक दायित्व होना चाहिए बल्कि पुलिस तथा किसी अन्य नागरिक, जो इस प्रकार की घटना से संबंधित है या जिसने इस प्रकार की घटना को देखा है, उसका भी यह प्राथमिक दायित्व होना चाहिए। 
भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया कोड, मोटर वाहन अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नही है कि किसी गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को या दुर्घटना के मामले में पुलिस के वहां पहुंचने तथा उस मामले की जांच-पड़ताल करने, प्रथम सूचना रिपोर्ट /एफआईआर तैयार करने तथा पुलिस द्वारा अन्य औपचारिकताओं से पूर्व डाॅक्टर पीडि़त व्यक्ति को चिकित्सा उपचार नहीं दे सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय:- दंड रिट याचिका सं. 270.1988, डी/-28.8.1989 (एआईआर 1989 सर्वोच्च न्यायालय 2039) में पं. परमानंद कटारा बनाम केन्द्र सरकार।

28.सड़क पर चलते दौरान पदयात्रियों को कौनसी सावधानी रखनी चाहिए ?

उत्तर:- सड़क पर चलते दौरान पदयात्रियों को निम्न सावधानी रखनी चाहिए- 
- ध्यानपूर्वक चलें। 
- सामने से आ रहे यातायात को देखें।
- जब आप सड़क पार कर रहे हो तो कभी यह मानकर नही चलें कि ड्राइवर ने आपको देख लिया है। आपके            जीवन की रक्षा आपकी अपनी जिम्मेदारी है। 
- जहां ड्राइवर नहीं देख पाए, वहां सड़क पार न करने से बचें।
- सड़क पार करने से पहले यातायात और आपके बीच उपयुक्त फासला होने का इंतजार करें।
- डिवाइडर रैलिग्ंस के उपर से कभी भी न कूदें। आप लड़खड़ाकर वाहनों पर गिर सकते हैं।
- बच्चो के साथ सड़क पार करते समय उनका हाथ थाम कर रखें।
- सुबह पैदल सैर करने और दौड़ने के लिए सड़क के इस्तेमाल से बचें।
- चढाई पर या टेढा रास्ता पार करते समय अतिरिक्त सावधानी रखें।
- पार्क की गई या खडी कारों के बीच रास्ता पार ना करें। 
- सबसे छोटा और सबसे सीधा मार्ग द्वारा सड़क पार करने से आपके समय की बचत होती है।

29.वाहन को तेज चलाने के क्या-क्या खतरे हो सकते हैं ?
उत्तर:-  वाहन को तेज चलाने पर निम्‍न खतरे हो सकते हैं:-

1. वाहन चालक की वाहन रोकने की क्षमता प्रभावित होना चालक को वाहन रोकने में कम समय मिलता है।2. वाहन की संरचना इस तरह की नहीं होती जो की भयानक दुर्घटना के प्रभाव को सह सके।
3. वाहन के सुरक्षा साधन जैसे एयर बैग, सेफ्टी बैल्ट, सड़क के उपकरण, बेरियर ब्रिज आदि क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
4. ड्राइवर के देखने व दूरी को समझने की क्षमता प्रभावित होती है। स्पीडिंग केवल खाली सड़कों या हाईवे की समस्या नहीं है यह शहर की गलियों में भी होती है। कई चालक सोचते हैं कि वे कुशलता से यातायात से बच सकते हैं भीड़ से बच सकते हैं अध्ययनों से पता चला है कि गति से 87 प्रतिशत दुर्घटनाएं हाईवे के अलावा शहरों में होती है।
5. 35 एमपीएच की जगह 45 एमपीएच से वाहन चलाने पर 5 मील की यात्रा में आप सिर्फ 2 मिनट ही बचा पाते हैं यानि दो मिनट पहले पहुंचने के लालच में दुर्घटना की जोखिम को कई गुना बढा देना है।
6. तेज गति से खराब मौसम में वाहन चलाना प्रमुख रूप से खतरनाक हो सकता है। कोहरे में तेज गति से वाहन चलाने से 53 प्रतिशत दुर्धटनाएं होती है।

30. सडक पर होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए क्‍या-क्‍या उपाय करने चाहिए ?

उत्तर:- दुर्घटनाओं से बचने के लिए उपाय:-

1. यात्रा से पहले योजना बनाएं। अपने पास इतना समय रखे की गन्तव्य पर सुरक्षित सही तरीके से पहुंच सकें , समय से 15 मिनट पहले निकले।

2. सम्भव हो तो इन्टरनेट से ट्रैफिक की स्थिति का आंकलन करे जिससे पता चल सके कि आपका कितने समय की जरूरत होगी।

3. खराब मौसम मे बारिश में ध्यान रखें दूसरे वाहन से दूरी बनाये रखे व गति सीमित रखें।

4. अगर आप लेट हो गये हो तो इस चीज को स्वीकार करें व गन्तव्य पर लेट पहुंचने पर माफी मांगे। जल्दी पहुंचने के लिए गति न बढाएं।

5. सीट बैल्ट, दुपहिया वाहन पर हैलमेट का प्रयोग करें यह सिर्फ कानून के लिए ही नहीं है बल्कि इससे दुर्घटना में आपको सुरक्षा मिलेगी।

31.यातायात सुरक्षा हेतु अभिभावकाें द्वारा अपने बालकों के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

उत्तर:- यातायात सुरक्षा हेतु अभिभावकों को अपने बच्‍चों के लिए निम्‍न बातों का ध्‍यान रखना चाहिए:-

1.    अभिभावक ये जाने की उनके बच्चे कहां है व क्या कर रहें है एवं किस तरह गाड़ी चला रहे हैं।
2.    उनसे बात करें उन्हें बताएं उनके कार्याें के क्या परिणाम हो सकते हैं एवं उन्हें क्या मुसीबत हो सकती है।
3.    जिम्मेदारी व सड़क सुरक्षा के खतरोें को जानने के लिए दबाव डालें।
4.    अपने साथियों द्वारा होने वाले दबाव के लिए चर्चा करें। कम उम्र में वाहन चलाने के लिए मना कर दें।
5.    जहाँ छोटे बच्चों का हाथ नहीं पहुंचे अपनी गाडी की चाबियों को वहां रखें।
6.    कई बार माता पिता महज अपना स्टेटस दिखाने के लिए बच्चों को गाडि़यां चलाने देते हैं जो कि गलत है। आपकी शानो शौकत आपके बच्चों की जिन्दगी से बढकर नहीं है।
सबसे बड़ा उदाहरण खुद पेश करेें, खुद यातायात नियमों का पालन करें, सड़क सुरक्षा नियमों का ध्यान रखें आपको सही कार्य करते देख वे खुद इन नियमों का पालन करेंगे व सुरक्षित रहेंगे।

32.वाहन चाहन में क्या-क्या सावधानी रखनी चाहिए और आपका चालक लाइसेंस कब निरस्त हो सकता है?

उत्तर - सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाने पर न केवल स्वयं चालक को बल्कि आम नागरिक जो सड़क का प्रयोग करता है, का भी जीवन खतरे में पड़ सकता है। जनहित व जनसुरक्षा की दृष्टि से ऐसे चालकों के विरूद्ध मोटर वाहन अधिनियम नियम में सख्त कार्यवाही की जायेगी, जिसमें चालक ड्राइविंग लाइसेंस निरस्तीकरण का भी प्रावधान है। संक्षेप में निम्न अपराध ऐसे है जिनमें उपरोक्त कार्यवाही की जा सकती हैै:- 

1. वाहन को खतरनाक तरीके से लहराकर चलाना।
2. वाहन तेज गति से चलाना अथवा गलत ढंग से ओवर टेकिंग करना।
3. लाल बत्ती पर नही रूकना। 
4. स्टाॅप लाइन से आगे अथवा जेबरा क्राॅसिंग पर वाहन खड़ा करना। 
5. किसी सक्षम अधिकारी द्वारा वाहन रोकने का इशारा करने पर वाहन नहीं रोकना।
6. मदिरा या मादक द्रव्यों के प्रभाव में रहते हुए वाहन चलाना।
7. वाहन को गलत जगह पार्क करना।
8. यात्री वाहनों को निर्धारित स्टैण्ड पर नहीं खड़ा करना तथा चलाते समय धूम्रपान करना।
9. वाहन चालन के समय मोबाइल फोन से वार्ता करना।

                 उक्त कृत्य करने पर अपेक्षित कार्यवाही :-

1. परिवहन/पुलिस विभाग के अधिकारी द्वारा वाहन चालक के विरूद्ध चालान किया जावेगा।
2. दोषी चालक पर आरोनित दण्ड एवं वसूल की गई पैनल्टी का अंकन लाइसेंस पर किया जावेगा तथा लाइसेंस को पंच किया जावेगा।
3. दो बार से अधिक अपराध करने पर पकड़े गये चालक के विरूद्ध मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 19 व केन्द्रीय मेाटर व वाहन नियम, 1989 के नियम 21 के तहत कार्यवाही कर दोषी चालक को अयोग्य घोषित करने अथवा लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही की जावेगी।
4. चालक द्वारा गंभीर अपराध जैसे वाहन चालन से किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पंहुचाना अथवा उसकी मृत्यु होने पर दोषी चालक के लाइसेंस के प्रथम अपराध पर ही निरस्तीकरण अथवा लाइसेंस हेतु अयोग्य घोषित करने की कार्यवाही अमल में लाई जावेगी।

 

33. में अपने विधालय/ कॉलेज/ प्रतिष्ठान आदि में विधार्थीयों/ कर्मचारियों को यातायात प्रशिक्षण हेतु यातायात प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिलवाना चाहता हॅू इसके लिए मुझे क्‍या करना होगा?

उत्तर - यातायात पुलिस जयपुर की यातायात शिक्षा शाखा में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों के द्वारा यातायात प्रशिक्षण दिया जाता है आपके विधालय/ कॉलेज/ प्रतिष्‍ठान के लैटरपैड पर श्रीमान पुलिस उपायुक्‍त, यातायात जयपुर के नाम होने वाले कार्यक्रम की पूरी जानकारी सहित पत्र भेजें ।  


          

 

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